नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता के तौर पर चर्चा में आए सौरव दास ने खुलासा किया है कि वह शुरुआत में पार्टी का प्रवक्ता बनने के लिए तैयार नहीं थे। पत्रकारिता में अपने करियर को लेकर उनके मन में आशंका थी कि अगर CJP अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुआ तो उनके लिए पत्रकारिता में वापस लौटना मुश्किल हो सकता है। नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के बाद सौरव दास को अब CJP का सह संयोजक बनाया गया है। वह यह जिम्मेदारी आशुतोष रांका के साथ साझा कर रहे हैं। वहीं पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है।
दीपके से पुराना परिचय, सोशल मीडिया से शुरू हुआ जुड़ाव
सौरव दास ने एक साक्षात्कार में बताया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके से उनका परिचय पहले से था। CJP का सोशल मीडिया खाता शुरू होने के बाद दीपके ने उन्हें सदस्यता अभियान को बढ़ावा देने के लिए कहा था। इसकी वजह यह थी कि सौरव दास के पास सोशल मीडिया पर अच्छी संख्या में अनुयायी थे।
इसी दौरान दीपके ने उन्हें CJP का प्रवक्ता बनने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, सौरव दास इस जिम्मेदारी को लेकर शुरुआत में झिझक रहे थे। उन्होंने बताया कि उस समय वह पत्रकारिता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण खबरों पर काम कर रहे थे और उनका करियर भी आगे बढ़ रहा था।
CJP में आने से पहले करियर को लेकर थी चिंता
सौरव दास ने बताया कि उस समय वह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत पर एक प्रोफाइल स्टोरी समेत संस्थान से जुड़ी कुछ अन्य खबरों पर काम कर रहे थे। ऐसे में CJP का प्रवक्ता बनने का प्रस्ताव उनके लिए करियर बदलने जैसा था।
उनके मन में सबसे बड़ा डर यह था कि अगर CJP किसी वजह से सफल नहीं हुआ तो पत्रकारिता में उनकी वापसी मुश्किल हो सकती है। उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने लिए जगह बनाई थी और उन्हें आशंका थी कि करियर बदलने के बाद अगर नया रास्ता सफल नहीं हुआ तो दोबारा पहले वाली जगह हासिल करना आसान नहीं होगा।
‘मुझे अपने अस्तित्व को लेकर जवाब पाना था’
सौरव दास ने बताया कि इसी वजह से वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में हिचक रहे थे। उनके लिए यह केवल एक पद स्वीकार करने का सवाल नहीं था, बल्कि अपने करियर की दिशा बदलने का फैसला था। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद से अपने अस्तित्व और भविष्य को लेकर जवाब तलाशना था।
लीगल रिपोर्टिंग को क्यों चुना था?
सौरव दास ने पत्रकारिता में अपनी पसंद के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कानूनी मामलों की रिपोर्टिंग को इसलिए चुना क्योंकि उनके मुताबिक अदालतें बेहद शक्तिशाली संस्थान हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को दुनिया की सबसे शक्तिशाली अदालतों में से एक बताते हुए कहा कि अदालतों द्वारा किए गए और नहीं किए गए काम पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है।
उनके मुताबिक, केवल अदालत में सुनाए गए फैसलों तक ही कहानी सीमित नहीं होती, बल्कि फैसलों के पीछे की प्रक्रिया, कानून और उससे जुड़ी राजनीति को समझना भी जरूरी है। सौरव दास ने कहा कि उन्हें लगा कि इस क्षेत्र में वह पत्रकार के तौर पर अपने लिए एक अलग जगह बना सकते हैं।
